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शिक्षित मूर्ख लोगो की कमी नही है। देश में

मोदीजी ने हाल मे एक वकतव्य दिया था, जिसने उन्होंने कहा था की गटर की गैस से भी चाय बनाई जा सकती है. इस बक्तव्य को लेकर अनेक लोगों ने सोशल मीडिया पर मोदीजी का मजाक उड़ना शुरू कर दिया.( ये लोग शिक्षित है, अनपढ़ लोग ऐसी बेवकूफी नहीं करते), वैज्ञानिक,

एन्जिनिएर,,डॉक्टर ,प्रोफेसर, पत्रकार, वगैरह. इनको देख कर एक बहुत पुराना जोक याद आ गया.
गडित के किसी फिस्सडी छात्र को ट्यूटर ने सवाल सिखाया. अगर एक घोडा 100 रूपए का है तो तीन घोड़े 300 के .एग्जाम मे लड़का फिर भी गलत कर आया. पूछने पर उसने कारण बताया की मास्टर जी आप ने तो घोड़े का दाम बताया था, एग्जाम मे गधे पर सवाल आया.

ये लोग भी पढ़े लिखे गधे है. सिर्फ अपने माथे पर डिग्री का गोदना लेकर घूम रहे है, बड़ी बड़ी डिग्री जैसे MA/MSc/PHD/ MBA//MTech/MBBS/MD. इन्होने गोबर गैस का नाम सुना है बल्कि उसके बारे मे सब रट रखा है लेकिन ये मानते है की गैस सिर्फ गोबर से बन सकती है, गटर मे सड़ रहे वेस्ट से नहीं और इसलिए मोदीजी गलत है .

गलती इनकी नहीं है हमारे एजुकेशन सिस्टम की है, जो सिर्फ रट्टा मारना सिखाता है और रट्टे के दम पर हिंदी/इंग्लिश /हिस्ट्री मे 100 मे 99 अंक दिलाता है, रट्टे के बूते डिग्री दिलवाता है, टॉप करवाता है ,फिर इन्हें ही प्रोफेसर तक बनवा देता है और साथ मे इनके दिमाग को किसी भी नए विचार के लिए हमेशा के लिए ब्लाक कर देता है नहीं तो क्या कारण है की, इन लोगों ने मोदीजी का मजाक उड़ाने के पहले गूगल पर बायो गैस पर सर्च नहीं किया .

Biogas typically refers to a mixture of different gases produced by the breakdown of organic matter in the absence of oxygen. Biogas can be produced from raw materials such as agricultural waste, manure, municipal waste, plant material, sewage, green waste or food waste. Biogas is a renewable energy source.

नहीं ये ऐसा नहीं करेगे क्यों की ये इनके कोर्स मे नहीं है और कोर्स के बाहर ये कुछ पढ़ते नहीं. कोर्स मे सिर्फ गोबर गैस थीै ,उसके बारे मे इन्हें सब याद है 100%.
आप इन्हें समझा नहीं सकते क्यों की ये आप से कुतर्क करेंगे( मूर्ख व्यक्ति हमेशा हठधर्मी और कुतर्की होता है) एक कुतर्क की बानगी देखिये, किसी ने मुझसे पूछा “ क्या आप अपने घर मे गटर की गैस पर चाय बनाते है” ऐसे लोगों को क्या जवाब दिया जाय और इन्हें क्या कहा जाय.

मैंने MBBS डॉक्टर्स को भी शिक्षित मूर्ख की श्रेणी मे रखा. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. इस देश मे हम कबीला मानसिकता के है. जैसे कबीले वाले अपने कबीले की कभी बुराई नहीं करते, वैसे ही इस देश मे अपनी जाती या अपने प्रोफेशन वालों की कभी बुराई नहीं करते. मै डॉक्टर हूँ,,मुझे डॉक्टर्स की बुराई नहीं करनी चाहिए थी लेकिन क्या करू गलती हो गई. अब गलती होही गई तो एक किस्सा भी सुना देता हूँ.

1990 की बात थी. UP पीएमएस मे जॉब के लिए इंटरव्यू हो रहे थे, चूंकि 2500 पोस्ट थी और करीब उतने ही एप्लिकेंट, इसलिए जॉब सब को मिल जानी थी और इंटरव्यू सिर्फ फॉर्मेलिटी ही था. IMS BHU के एक प्रोफेसर, जो इंटरव्यू बोर्ड के मेम्बर थे, मुझे बताया था “कमीशन के चेयरमैन ने कहा: डॉक्टर साहिब, चूंकि पोस्ट और कैंडिडेट करीब करीब बराबर है ,इसलिए हमे सब को लेना है ,

लेकिन आप इंटरव्यू पूरा लीजिये और A,B,C,D,E, ग्रेड नालेज के आधार पर दीजिये . हम D ग्रेड तक सब को ले लेंगे, आप E ग्रेड सिर्फ उसको दीजिये, जिसमे आप को ये लगे की इसको पोस्ट करने से अच्छा है की मरीज़ बिना इलाज के रहे”

मुझे प्रोफेसर की बात से जरा भी आश्चर्य नहीं हुआ ,क्यों की मैंने ऐसे MBBS डॉक्टर देखे है जिन्हें कुछ नहीं आता, जिन्हें धक्का देकर पास किया गया ,जो quack से बदतर थे, अपने कॉलेज मे, सरकारी कॉलेज मे और इसमें सब थे जनरल केटेगरी वाले भी. हां ऐसा कोई MD/MS नहीं देखा है ,वैसे वो भी कभी मिल गया तो ज्यादा आश्चर्य नहीं होगा, ध्यान रहे की मै इनके मेडिकल ज्ञान की बात कर रहा हूँ ,सामान्य ज्ञान की नहीं. जब मेडिकल, जो सबसे मुश्किल पढाई है वहां ऐसे शिक्षित मूर्ख मिल सकते है ,तो बाकि जगह कहना ही क्या .

यही शिक्षित मूर्ख जोर शोर से मोदीजी का ,अपने देश के प्रधान मंत्री का सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाने मे लगे है.
मनोज त्रिवेदी

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