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असम में हिंदू हो गया है अल्पसंख्यक पूरे बंगाल मे 2 करोड़ से ज्यादा घुसपैठिये है।

नमस्कार मैं हूं सुमेर जाट असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन से एक आंकड़ा निकला और पूरे हिंदुस्तान की सियासत दो हिस्सों में बट गई एक तरफ दावा देश हित का दूसरी तरफ चेतावनी गृह युद्ध की सियासत मुद्दा ढूंढ रही है

लेकिन देश के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या अब समय आ गया है कि समूचे देश में नागरिक को और उसके बीच में छुपे बैठे घुसपैठियों की पहचान की जाए

असम के 4000000 नागरिकों का अवैध आंकड़ा जरूरी नहीं थी पूरा सच हो लेकिन कुछ एक लाख तो जरूर उसमें घुसपैठिए होंगे इसमें शक नहीं किया जा सकता लेकिन क्या अब यह जरूर नहीं हो चुका है कि देश भर से उन घुसपैठियों को चिन्हित किया जाए जिनकी वजह से भारतीय नागरिकों का जीवन संतुलन बिगड़ चुका है

यह कैसा मुद्दा है की सियासत देश को गृह युद्ध की धमकी से बाज नहीं आ रही यह कौन सा मुद्दा है जो देश को खूनी संघर्ष में डूब जाने की चेतावनी दे रहा है यह किसका मुद्दा है जो असम से लेकर बंगाल तक और बंगाल से लेकर दिल्ली तक हंगामा मच गया

बात तो अवैध रूप से हिंदुस्तान के संसाधनों की दोहन करने वाले घुसपैठियों की थी बात तो देश की सीमाओं की अतिक्रमण और सुरक्षा की थी पर बात तो यह थी भारत के नागरिक है ही नहीं वह भारत की जमीन का इस्तेमाल करें क्यों फिर यह बेचैनी कैसी यह धमकियां कैसी है यह तेवर कैसे हैं

2009 में देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी इस पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित कमेटी ने असम के नागरिकों संख्या को लेकर एक ड्राफ्ट तैयार किया

इसमें 3.29 करोड आवेदन दिए गए इसमें दो करोड़ 8900000 लोगों को नाम शामिल हुए बाकी के 4060707 लोग नागरिकता सिद्ध नहीं कर पाए या फिर यूं कहें कि वह भारत के नागरिक होने का पक्का प्रमाण नहीं दे पाए

पहचान आसाम में छुपे घुसपैठियों की हो रही है लेकिन सबसे ज्यादा परेशान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी है उन्हें डर है कि असम से लगे अपने राज्य की सीमाओं में एनआरसी का भूत पहुंच गया तो उनकी सियासी समीकरण पर असर पड़ सकता है

2011 के सेंसेक्स के अनुसार पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की आबादी 27 प्रतिशत से अधिक है राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 85 विधानसभा सीटों पर मुसलमान 30 प्रतिशत से अधिक है

21 विधानसभा सीटों वाले मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी 66.27 प्रतिशत है

12 विधानसभा वाले मालदा में मुस्लिम आबादी 51.3 प्रतिशत है

जबकि 9 विधानसभा सीटों वाले उत्तर दिनाजपुर में मुस्लिम आबादी 49.9 प्रतिशत है

11 विधानसभा सीटों वाले बीरभूम में मुस्लिम आबादी 37.1% है

31 विधानसभा क्षेत्र वाले दक्षिण परगना में मुस्लिम आबादी 35.6 प्रतिशत है

समझना मुश्किल नहीं है की ममता बनर्जी ने घुसपैठियों के मुद्दे पर बंगाली और मुसलमानों से जोड़ कर पूरे देश में हवा बनाने की कोशिश की है

तमाम सुरक्षा एजेंसियां भारत में समय-समय पर अवैध रूप से घुसने वाले घुसपैठियों को लेकर चिंता जताते रहती है
राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे की चेतावनी देती रहती है

कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया बॉर्डर मैनेजमेंट टाक्स फोर्स की साल 2000 रिपोर्ट में यह स्पष्ट कहा गया कि कम से कम पेट्रोल घुसपैठिए भारत में घुस चुके हैं

किसी सरकार ने कोई प्रयास नहीं किया गया सवाल यह उठता है कि वोट बैंक की राजनीति क्या वाकई देश से बड़ी हो चुकी है

साल 2005 में घुसपैठियों पर गहरी चिंता और गुस्सा दिखाने वाली ममता लोकसभा में बड़ा हंगामा किया था
स्पीकर की ओर आंकड़ों का पुलिंदा फेंक दिया गया था लोकसभा से इस्तीफे की धमकी तक दे दी थी

अब वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री है विपक्ष की सब घोषित लीडर भी है लेकिन उन्हें घुसपैठियों के साथ खड़ी है

और देश को गृह युद्ध और खूनी संघर्ष की धमकियां दे रही है

2012 में असम के कोकराझार में जो हिंसा हुई थी उस में 77 से ज्यादा लोग मारे गए थे जबकि हजारों लोग घर से बेघर हो गए हिंसा में बांग्लादेशी घुसपैठियों के शामिल होने की बात जब सामने आई तो पूरा देश सकते में आ गया था

2012 में रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन और कोकराझार हिंसा के विरोध में जिस तरह मुंबई का आजाद मैदान बंधक बना लिया गया था प्रशासनिक व्यवस्था है बेबस हिंसा का तांडव देखती रह गई थी उन तस्वीरों ने भी देश को बेचैन किया जांच में यह बात सामने आई कि उन प्रदर्शन मैं भी बहुत सारे बांग्लादेशी घुसपैठिए शामिल थे पश्चिम बंगाल में जब-जब सांप्रदायिक दंगे होते रहते हैं उनमें भी कहीं ना कहीं कनेक्शन बांग्लादेशी घुसपैठियों से जुड़ी जाता है

ममता बनर्जी की मौजूदा राजनीति मानवता से प्रेरित हो रही है या सियासत से यह आईना तो टीएमसी के असम के अध्यक्ष ने ही उन्हें दिखा दिया

उन्होंने अपना इस्तीफा तक सौप दिया वही बाकि मुद्दे पर टीएमसी के समर्थन में खड़ी कांग्रेस भी अलग-थलग नजर आई पश्चिम बंगाल के राज्य कांग्रेस अध्यक्ष रंजन चौधरी ने खुलकर ममता बनर्जी की सच्चाई बयां की

एनआरसी की रिपोर्ट सामने आई है तो राजनीति के हंगामे के जरिए ही सही लेकिन एक गंभीर सवाल पूरे देश के सामने है यह सही है कि अभी मुद्दा भभक कर जल उठा है लेकिन इसका इतिहास बहुत पुराना है बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा 70 के दशक से ही सुलग रहा है

बात 1971 की है जो पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी फौज के अमानवीय अत्याचारों से तंग आकर लाखों बांग्लादेशियों ने भारत में घुसपैठ करना शुरू कर दिया संख्या का संतुलन बिगड़ा तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कहा था कि कि लाखों-लाखों बांग्लादेशी घुसपैठिए भारत में आ रहे हैं और भारतीय आम नागरिकों के संसाधनों पर अपना हक जमा रहे हैं हम उनको नहीं रखेंगे और उनको बाहर फेंक देंगे लेकिन राजनीतिक दबाव और अपने निहित स्वार्थ के कारण यह मुद्दा भी दबा दिया गया और फिर उसके बाद राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण घुसपैठियों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती गई

लेकिन आज स्थिति यह है कि कांग्रेस अपने ही अतीत से पीछा छुड़ाती दिख रही है विकिलीक्स की बात को अगर सच माने तो 2011 में घुसपैठियों को बचाने के लिए सोनिया गांधी ने फॉरेनर्स एक्ट 2006 को लागू करवाया था

फिलहाल संसद में खड़े होकर कांग्रेस के नेता घुसपैठियों का मानव अधिकार तलाश रहे हैं राजनीति वही करती है जो उसके वर्तमान को सूट करता है अतीत को कौन याद रखें

बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट के रिपोर्ट के अनुसार 1951 से 1961 के बीच 3500000 लोग पूर्वी पाकिस्तान से गायब हो गए थे (बांग्लादेश को पहले पूरी पाकिस्तान कहा जाता था) संभवता वह सब भारत में अवैध तरीके से घुस गए थे

इसी रिपोर्ट का कहना है कि 1974 में भी करीब 2000000 लोग भारत में जा घुसे थे

1998 में असम के तब के राज्यपाल जनरल एस के सिन्हा ने राष्ट्रपति को एक चिट्ठी लिख कर यह चिंता जताई कि जिस तरह से बांग्लादेशी आबादी भारत में घुस रही है असम की मूल संस्कृति और संसाधन पर खतरा मंडरा रहा है अब जब एनआरसी की रिपोर्ट सामने आई है जो तस्वीर चौका देने वाली है

जो आंकड़े असम से निकलकर सामने आए हैं वह देश की पूरी राजनीति को सचमुच चिंतन का संकेत दे रहे हैं

असम देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जो मुस्लिम आबादी सबसे तेजी से बढ़ी है

वह हैरान करने वाली है एक रिपोर्ट के अनुसार 1971 से 1991 के बीच हिंदू आबादी 41.89 फ़ीसदी बढ़ी है

जबकि मुस्लिम आबादी असम में 1971 से 1991 के बीच में 77.42 प्रतिशत बढ़ी है

1991 से 2001 के बीच हिंदू आबादी 14.95 प्रतिशत बढ़ी है

वहीं मुस्लिम आबादी 1991 से 2001 के बीच बड़ी तेजी से 29.3 प्रतिशत बड़ी है

2011 की जनगणना के अनुसार अगर देखें तो 9 जिले ऐसे हैं जहां हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं

असम के बालपेपर में मुसलमानों की आबादी 70.74 प्रतिशत है जबकि हिंदू आबादी 29.11 प्रतिशत है

अभी भी समय है। एक हो जाओ और देश मे ऐसे कितने घुसपैठियों की पहचान करकर उनको बाहर निकलना होगा आप को ये आर्टिक्ल कैसे लगा कृपया कमेंट करकर जरूर बताये