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राफेल विवाद कौन देश को गुमराह कर रहा है ? क्या है राफेल की पूरी सच्चाई ?

#राफेल_विवाद
कौन देश को गुमराह कर रहा है ??

क्या है राफेल की पूरी सच्चाई ?? क्या वाकई न खाऊंगा, न खाने दूँगा कहने वाले मोदी ने कर लिया देश से समझौता ?? आइए जानते हैं क्या है राफेल डील…

राफेल दरअसल एक लड़ाकू विमान है जो फ्रांस की Dassault विमान कंपनी अन्य देशों के लिए बनाती है, इस डील में फ्रांस पैसों के बदले अपने राफेल विमान अन्य देशों को देता है।

Upa के समय लड़ाकू विमान का मानो अकाल पड़ गया था, वहीं सेना के विमानों की टुकड़ी 42 से 34 पर आ गयी थी, इसलिए जरूरत थी राफेल विमानों की डील जल्द से जल्द करी जाए…
बहुत जतनो के बाद भी मनमोहन सिंह इस डील को कराने में विफल रहे, लेकिन मोदी ने अपने पहले ही कार्यकाल में इसे कर दिखाया, हालांकि इसी डील पर संसद में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर कई संघिन आरोप लगाए, लेकिन उन आरोपो में कितनी सच्चाई है, जरा नजर डालते हैं…

#आरोप- 1
Upa के टाइम पर राफेल विमान की कीमत 520 करोड़ rs प्रति हवाई जहाज..
#जवाब
इस इल्जाम की वजह से राहुल खुद ही अपने बयानों की पोल खोल देते हैं, राहुल गांधी का कहना है मनमोहन सिंह ने upa के दौरान 238 मिलियन डॉलर प्रति प्लेन की डील करी थी। लेकिन इसमे सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर डील हो गयी थी तो प्लेन है कहाँ ?? क्या उन्हें भी मशीन में डालकर सोना बना दिया गया ??
दरअसल ये डील कभी हुई ही नही, ये तो राहुल की चाल थी कि एक झूठ को इतनी बार बोलने की, की सबको सच लगने लगे, जैसा कि दृश्यम मूवी में अजय देवगन मे 2 oct वाली बात के साथ किया…

2007 में शुरू हुई इस डील का हाल ये था कि ये कहीं पहुँच ही नही पा रही थी, अप्रैल 2012 में upa द्वारा किये गए cost price को फ्रांस सरकार ने यह कह कर मना कर दिया था कि यह समझौता 212 मिलियन डॉलर प्रति प्लेन से कम में मुमकिन ही नही है,

हालांकि हमारी होनहार मीडिया इसे 82.5 मिलियन डॉलर प्रति प्लेन की बता रही थी, अब 82.5 में कौनसा राफेल विमान मिल रहा था ये तो मीडिया ही जाने, उसके ठीक 1 साल बाद अप्रैल 2013 में मीडिया ने खुद ही इसकी कीमत 50% बढ़ाकर 119 मिलियन डॉलर प्रति प्लेन में की और फिर जनवरी 2014 में 300% बढ़ाकर इसकी कीमत 238 मिलियन डॉलर प्रति प्लेन बताया, लेकिन गौर तलब बात ये है की 238 मिलियन डॉलर प्रति प्लेन तय होने के बावजूद upa की बाकी स्कीमो की तरह मनमोहन सरकार इसको अंजाम तक नही पहुँचा पाये और ये डील कभी हो ही नही पाई, हालांकि इससे भारत और फ्रांस के रिश्तों में काफी हद तक तनाव जरूर आ गया था।

#आरोप_2
Nda ने हमसे महंगे में डील करी..
#जवाब_
राहुल गांधी का कहना है जहां मनमोहन जी 2014 में हुए 238 मिलियन डॉलर में ये डील करने वाले थे वही nda ने यही डील 2018 में 243 मिलियन डॉलर प्रति प्लेन में की है,
यहाँ भी राहुल की बातें किसी कार्टूनि सपने से कम नही है, कोई भी डील तब पूरी होती है जब दोनो पार्टियां एक दूसरे की शर्तों पर राजी हो। मनमोहन सरकार ने इस डील को 238 मिलियन डॉलर प्रति प्लेन में करना चाहा लेकिन फ्रांस ने इस डील को सिरे से नकार दिया और प्रमुख कारण था पैसा…

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति से मिले और 4 साल की बढ़ती कीमत के बावजूद फ्रांस के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए ये डील 243 मिलियन डॉलर में तय करी,
मोदी पक्के गुजराती है, उन्होंने इस डील पर हामी तो भरी , लेकिन साथ मे ये वादा भी फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ किया कि वो भारत के साथ राफेल विमानों की टेक्नोलॉजी को शेयर करेंगे ताकि हम आगे आने वाले समय मे खुद से राफेल जैसे विमानों बनाने में सक्षम रहे, विमान में लगने वाले माल कई भारतीये कंपनियों से खरीदे जाए, फ्रांस विमान का कुछ हिस्सा भारत मे बनाएगा ताकि भारतीय को भी रोजगार मिले, प्लेन पूरी तरह से भारत के जरूरत के हिसाब से बनेगे, इतनी शर्तो के बावजूद ये मोदी का जादू ही था कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने मोदी के साथ डील फाइनल करली वो भी बाकी देशों के मुकाबले सबसे कम दामों में।

भारत और फ्रांस की राफेल डील बाकी देशों के मुकाबले सबसे सस्ती है, जहां Qatar ने 292 और Egypt ने 249 मिलियन डॉलर में ये डील साइन करी, वही मोदी ने इस डील को भारत के लिए 243 मिलियन डॉलर प्रति प्लेन की डील वो भी अपने शर्तो ले हिसाब से साइन करके दी।

#आरोप_3
इसका कॉन्ट्रैक्ट रिलायंस को क्यो दिया गया, इतने सालों से प्लेन बना रही HAL को क्यो नही ??
#जवाब__
राहुल गांधी का अगला और सबसे संघिन आरोप है कि मोदी ने राफेल के कॉन्ट्रैक्ट भारत ने Reliance को दिया और सालो से प्लेन बना रही HAL यानी Hindustan Aeronautics को नही।
लगता है राहुल के स्पीच राइटर की उनके साथ ज्यादती दुश्मनी है, तभी उन्होंने ये बात छुपा ली की Air contract, प्लेन बनाने की नही बल्कि दूसरे उपकरणों के लिए किया गया था और HAL हिंदुस्तान की प्लेन बनाने वाली कंपनी है जिसे अन्य उपकरणों को बनाने का कोई तजुर्बा नही है तो उनको कॉन्ट्रैक्ट दे ही क्यो ?? ये तो वही बात हो गयी की लौहार की दुकान पर खड़े होकर आप शिकंजी की डिमांड कर रहे हैं।

राहुल ने 2 झूठ और बोले कि मोदी ने कॉन्ट्रैक्ट अम्बानी को दिया, दूसरा सबसे बड़ा ये की कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ रिलायंस को मिला। जबकि सच ये है कि ये कॉन्ट्रैक्ट केवल रिलायंस को ही नही, बल्कि Tata, L & T, Godreg, DRDO यानी डिफेंस रिसर्च & डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन जैसी अन्य 72 कंपनियों को दिय्या गया और यह कॉन्ट्रैक्ट किसी और ने नही बल्कि खुद फ्रांस ने दिय्या था, जिसमे मोदी या भारत सरकार का कुछ भी लेना देना नही था।

राफेल डील को पूरी तरह से समझकर आप मान ही गए होंगे कि राहुल गांधी 2000 से आज भी विपक्ष के सबसे बड़े नेता हैं,
एक पुरखों की वजह से, दूसरा मूर्खो की वजह से…

राहुल के तीनों सवालों का जवाब दिया लेकिन राहुल से एक सवाल पूछना चाहते हैं की, अगर upa ने फ्रांस से इतना अच्छा समझौता कर ही लिया था तो किस कारण से ये डील पूरी नही हुई ??
कही ऐसा तो नही की सोनिया गांधी एक और ऑगस्टा और बोफोर्स की तैयारी में थी ??

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